रियल एस्टेट डेवलपर्स की ओर से दी जाने वाली सबवेंशन स्कीम लेने से पहले सावधान रहे

बिल्डर्स द्वारा दी जाने वाली सबवेंशन स्कीम लेने से पहले सावधान रहें। चूँकि बिल्डर्स स्वतंत्र संस्थाएं है और कानूनी तौर से किसी भी तरह की स्किम बनाने के लिए आज़ाद है। 

जुलाई में नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) ने  हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को डेवेलपर्स के साथ मिलकर किसी भी तरह की सबवेंशन स्कीम ऑफर करने से मना किया था। इस पर, अब कुछ बिल्डर्स ने अपनी तरफ से ही ग्राहकों को लुभाने के लिए सबवेंशन स्कीम देना शुरू कर है। आमतौर पर ऐसी स्कीम में ग्राहक को 15 से 20 % का एडवांस देना होता है घर बुक करने के लिए और बाकि का पैसा घर का कब्ज़ा लेते समय देना पड़ता है। कुछ बिल्डर्स ऐसे भी है जो उनके अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में घर खरीदने पर घर का किराया भी दते है। एक मोर्टगेज एडवाइजरी कंपनी मॉर्टगेज वर्ल्ड के अधिकारी “विपुल पटेल” के अनुसार कुछ बैंक अभी भी इस तरह की  स्कीम में लोन दे रहे है क्यों की वो  NHB के उस सर्कुलर के तहत नहीं आते।

अगर आप घर खरीद रहें है और बिल्डर्स की ऐसी स्कीम जिसमे आपको 9 से 20 %  अभी देना है और बाकि का पैसा कब्ज़ा लेने के बाद लोन से चुकाना है तो इसमें किसी तरह का रिस्क नहीं है। एक बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी  के अनुसार  अगर सुरुवात में ही कोई फाइनेंसर (हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ) एग्रीमेंट में शामिल है तो आपको सावधान रहने की जरुरत है, क्योंकी NHB के प्रतिबन्ध के बाद कुछ बिल्डर्स फाइनेंसर की जगह ग्राहकों को ही ब्याज रि-एम्बर्स करने का ऑफर दे रहे है।

Ban impact limited

Source: ANAROCK Research, for April-June 2019

लोन लेने से पहले आपको एग्रीमेंट को सावधानी से पढ़ लेना चाहिए। चूंकि डेवलपर्स स्वतंत्र संस्थाएं हैं, वे स्वीकार्य कानूनी ढांचे के अंदर किसी भी तरह की स्कीम ऑफर करने के लिए स्वतंत्र हैं। विपुल पटेल जी के अनुसार किसी भी तरह की लोन सम्बन्धी दस्तावेज को साइन करने से पहले आपको लीगल और टैक्स एडवाइस जरूर ले लेनी चाहिए। हालाँकि RBI ने अभी तक NHB  के इस सर्कुलर पर कोई भीआदेश जारी नहीं किया है, पर 2013 में RBI  ने 20 : 80  और 5 : 95 स्कीम पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही बिल्डर्स ने ग्राहकों को इस तरह की कंस्ट्रक्शन लिंक्ड सबवेंशन स्कीम्स  देना  शुरू कर दिया। इस तरह के स्कीम्स पर पूरी तरह से निगरानी नही रखी जा सकती है, क्योकि ऐसी स्कीम्स बिल्डर्स के कायदे और कानूनों के अंदर आता है। आधार हाउसिंग फाइनेंस के MD और CEO, डी. एस. त्रिपाठी के अनुसार,  फ़िलहाल इस तरह की सबवेंशन स्कीम्स से दूर रहने में ही समझदारी है।

जिन ग्राहकों ने इस तरह की स्कीम पहले ही ले रखी है उनके लिए बहुत ही बड़ी दुविधा खड़ी हो गयी है। क्योकि, NHB द्वारा जारी किया गया सर्कुलर न केवल नए बल्कि पुराने स्कीम्स पर भी लागु होती है। यहां तक ​​कि अगर आपने इस सर्कुलर के लागु होने से पहले एग्रीमेंट साइन किया हो तब भी आप परेशानी में पड़ सकते है। अगर कंस्ट्रक्शन में देरी हुई तो, फाइनेंस कंपनी एग्रीमेंट से पीछे हट सकती है, क्योकि डिस्बर्स-मेन्ट कंस्ट्रक्शन स्टेज लिंक्ड है। ऐसी स्थिति में, एग्रीमेंट में सुधार करने के लिए आपको बिल्डर से संपर्क करना होगा।

अगर लोन पहले से ही डिस्बर्स-मेन्ट हो चूका है तब NHB का ये सर्कुलर लागु नहीं होगा। पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस के ईडी और बिजनेस हेड “शाजी वर्गीस” कहते हैं कि नए रेगुलेशन आने से पहले ही किए गए डिस्बर्समेंट के लिए कर्जदाताओं को सबवेंशन जारी रखना होगा।

पहले क्या स्कीम थी और अब क्या होगा ?

  • घर खरीददार अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट्स बुक करने के लिए 5 से 20 % एडवांस देते थे।
  • लोन सेंक्शन हो जाने के बाद कर्जदाताओं को कब्ज़ा मिलने तक या तय तारीख तक कोई भी पैसे नहीं देने पड़ते थे।
  • कर्जदाताओं की जगह बिल्डर ही लोन का ब्याज चुकाते थे।

NHB’s New Circular

  • कोई भी नया लोन इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम के तहत डिस्बर्स नहीं होगा।
  • ऐसे ग्राहक जिनका लोन सैंक्शन तो हो गया है पर अभी बिल्डर को डिस्बर्स नहीं हुआ है उन पर भी ये सर्कुलर लागु होता है।
  • हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को पहले से चल रही सबवेंशन स्कीम को  रिव्यु करना होगा।

 

News Source: Economictimes.com

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